अब ऐसा आलू जिसमें प्रोटीन ज्यादा शुगर कम
सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नयी दिल्ली : कृषि वैज्ञानिकों को आलू की ऐसी प्रजातियां विकसित करने में सफलता मिली है, जिसमें प्रोटीन व अन्य विटामिन की मात्रा सामान्य प्रजाति के मुकाबले तीन गुना अधिक है। इस किस्म का ईजाद आलू में चौराई के जीन को मिलाकर किया गया है। आलू की इन नायाब प्रजातियों में शुगर की मात्रा बहुत कम हो गई है, जिससे आलू प्रसंस्करण(प्रोसेसिंग) उद्योग को बल मिलेगा। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के इस अग्रणी शोध के लिए राजधानी में जुटे दुनिया भर के आलू वैज्ञानिकों ने उसकी पीठ ठोंकी है। चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश के आलू उत्पादक राज्यों से किसानों को भी आमंत्रित किया गया है। सीपीआरआई के निदेशक एस.के. पांडेय ने कहा कि वर्ष 1999 तक देश में आलू की ऐसी कोई प्रजाति नहीं थी, जिसमें शुगर की मात्रा कम हो। इसके चलते आलू प्रसंस्करण और आलू उत्पादों का निर्यात नगण्य था। इस मुश्किल को सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने चुनौती के रूप में स्वीकार किया और नई प्रजातियों के ईजाद में जुट गए। संस्थान की पहली प्रजाति कोफरी सूर्या के नाम से खेतों तक पहुंची, जिसका प्रदर्शन उल्लेखनीय है। इस प्रजाति के आलू की खेती 22 से 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर भी की जा सकती है, जिसका लाभ आलू की खेती के लिए गैर परंपरागत राज्यों को भी मिलने लगा है। डाक्टर पांडेय ने बताया कि संस्थान में चार ऐसी संकर प्रजातियां विकसित की गई हैं, जिनमें शुगर की मात्रा अल्प है। जबकि स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जरूरी प्रोटीन की मात्रा बढ़कर तीन गुना तक हो जाएगी। आलू को लेकर फैली भ्रांतियों के बारे में डाक्टर पांडेय ने साफ किया कि आलू में वसा की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन तले जाने पर आलू इसे बहुत अधिक सोख लेता है। आलू का प्रोटीन बहुत दुर्लभ किस्म का होता है। चौराई के जीन के साथ मिलने पर जो संकर प्रजाति तैयार होती है, वह अपने आप में खास हो जाती है।
12 Dec 2008
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